Economics Elective Paper II

Money and Banking (मुद्रा एवं बैंकिंग)

यह पाठ्यपुस्तक मुद्रा के सिद्धांत, इरविंग फिशर का परिणाम सिद्धांत ($MV=PT$), कैम्ब्रिज समीकरण, वाणिज्यिक बैंकों की साख सृजन प्रक्रिया (Credit Creation Multiplier), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के उपकरण (Repo, CRR, SLR), मुद्रा आपूर्ति के माप ($M_1, M_2, M_3, M_4$), तथा बैंकिंग सुधार (NPA, IBC 2016, UPI) को समेटती है।

Fisher & Cambridge Quantity Theory Equations
Credit Multiplier Solved Numericals Included
RBI Policy Tools Repo, CRR, SLR & OMO
Unit I

Money and Quantity Theory of Money

1.1 Functions and Evolution of Money (मुद्रा के कार्य एवं विकास)

वस्तु विनिमय प्रणाली (Barter System) की आवश्यकताओं के दोहरे संयोग (Double Coincidence of Wants) की समस्या को दूर करने के लिए मुद्रा का आविष्कार हुआ।

Prof. Walker's Definition

"Money is what money does." (मुद्रा वह है जो मुद्रा का कार्य करे।)

श्रेणी (Category) मुद्रा के मुख्य कार्य (Functions of Money)
प्राथमिक कार्य (Primary Functions) 1. विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange): क्रय-विक्रय को सुगम बनाना।
2. मूल्य का मापक (Measure of Value): सभी वस्तुओं का मूल्य मुद्रा में व्यक्त करना।
द्वितीयक कार्य (Secondary Functions) 1. स्थगित भुगतानों का मान (Standard of Deferred Payments): भविष्य के ऋण चुकाने का आधार।
2. मूल्य का संचय (Store of Value): धन को सुरक्षित संचित रखने का साधन।
आकस्मिक कार्य (Contingent Functions) राष्ट्रीय आय का वितरण, साख का आधार, अधिकतम तुष्टि गुण की प्राप्ति।
1.2 Irving Fisher's Quantity Theory of Money (फिशर का मुद्रा परिमाण सिद्धांत)

अमेरिकी अर्थशास्त्री Irving Fisher ने 1911 में प्रकाशित अपनी पुस्तक "The Purchasing Power of Money" में नकद लेन-देन दृष्टिकोण (Cash Transaction Approach) प्रस्तुत किया।

Fisher's Basic Equation of Exchange:
\[ MV = PT \quad \implies \quad P = \frac{MV}{T} \]

जहाँ: $M$ = वैधानिक मुद्रा की मात्रा, $V$ = मुद्रा का चलन वेग (Velocity of circulation), $P$ = सामान्य मूल्य स्तर (Price Level), $T$ = सौदों या व्यापार की कुल मात्रा (Transactions)।

Extended Equation (साख मुद्रा सहित):
\[ MV + M'V' = PT \quad \implies \quad P = \frac{MV + M'V'}{T} \]

जहाँ: $M'$ = बैंक साख मुद्रा (Credit Money), $V'$ = साख मुद्रा का चलन वेग।

Key Proposition of Fisher's Theory

अन्य बातें समान रहने पर ($V, V', T$ स्थिर रहने पर), यदि मुद्रा की मात्रा ($M$) दोगुनी (Doubled) कर दी जाए, तो सामान्य मूल्य स्तर ($P$) भी दोगुना (Doubled) हो जाएगा और मुद्रा का मूल्य (Purchasing Power $1/P$) आधा (Halved) हो जाएगा।

1.3 Cambridge Cash Balance Approach (कैम्ब्रिज नकद शेष दृष्टिकोण)

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्रियों (Alfred Marshall, A.C. Pigou, D.H. Robertson, J.M. Keynes) ने मुद्रा की माँग को केवल विनिमय के माध्यम के रूप में देखने के बजाय "संचय के साधन" (Store of Value) के रूप में देखा।

Marshallian Cambridge Equation:
\[ M = kPY \quad \implies \quad P = \frac{M}{kY} \]

जहाँ: $Y$ = वास्तविक राष्ट्रीय आय (Real Income), $k$ = राष्ट्रीय आय का वह भाग जिसे लोग नकद रूप में अपने पास रखना चाहते हैं, $P$ = मूल्य स्तर, $M$ = मुद्रा की कुल पूर्ति।

1.4 Demand-Pull vs Cost-Push Inflation (माँग-प्रेरित बनाम लागत-वृद्धि मुद्रास्फीति)
तुलना बिंदु माँग-प्रेरित मुद्रास्फीति (Demand-Pull) लागत-वृद्धि मुद्रास्फीति (Cost-Push)
कारण (Cause) कुल माँग (Aggregate Demand) का कुल पूर्ति (Aggregate Supply) से अधिक होना ($AD > AS$)। उत्पादन लागत (कच्चा माल, मजदूरी, ईंधन, कर) में वृद्धि होना।
समीकरण / ग्राफ $AD$ वक्र का दाईं ओर खिसकना। $AS$ वक्र का बाईं ओर खिसकना।
नियंत्रण उपाय मौद्रिक संकुचन (दरें बढ़ाना) व कर वृद्धि द्वारा माँग घटाना। कच्चे माल पर सब्सिडी व उत्पादन तकनीक में सुधार।
Unit II

Banking and Credit Creation

2.1 - 2.2 Commercial Bank Credit Creation & Multiplier (साख सृजन एवं साख गुणक)

वाणिज्यिक बैंक केवल जमा स्वीकार करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे साख का सृजन (Credit Creation) भी करते हैं। Prof. Hartley Withers के शब्दों में: "Loans create deposits and deposits create loans." (ऋण जमाओं को जन्म देते हैं और जमाएँ ऋणों को जन्म देती हैं।)

Credit Multiplier Formula:
\[ \text{Credit Multiplier (K)} = \frac{1}{\text{CRR}} \] \[ \text{Total Credit Created} = \text{Primary Deposit} \times \frac{1}{\text{CRR}} \]
Solved Numerical Example यदि प्रारंभिक प्राथमिक जमा (Primary Deposit) ₹10,000 है और नकद आरक्षित अनुपात (CRR) 10% है, तो बैंकिंग प्रणाली द्वारा कुल कितना साख सृजन होगा?

हल:

1. साख गुणक $K = \frac{1}{\text{CRR}} = \frac{1}{0.10} = 10$

2. कुल साख सृजन = $\text{प्रारंभिक जमा} \times K = 10,000 \times 10 = ₹1,00,000$

3. निर्मित व्युत्पन्न जमा (Derivative Deposit) = $1,00,000 - 10,000 = ₹90,000$

चरण (Rounds) प्राथमिक जमा (Deposits) ऋण स्वीकृत (Loans) [90%] नकद कोष (CRR) [10%]
Round 1 (Bank A) ₹10,000 ₹9,000 ₹1,000
Round 2 (Bank B) ₹9,000 ₹8,100 ₹900
Round 3 (Bank C) ₹8,100 ₹7,290 ₹810
कुल योग (Total) ₹1,00,000 ₹90,000 ₹10,000
2.3 Reserve Bank of India (RBI) & Monetary Policy Tools (मौद्रिक नीति के उपकरण)

आरबीआई की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI Act 1934 के तहत हुई और 1 जनवरी 1949 को इसका राष्ट्रीयकरण हुआ।

उपकरण का नाम (Tool Name) कार्यप्रणाली एवं प्रभाव (Mechanism & Impact)
रेपो दर (Repo Rate) वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। रेपो दर बढ़ाने से लोन महँगे होते हैं और मुद्रास्फीति घटती है।
रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo) वह दर जिस पर RBI बैंकों से अधिशेष धनराशि स्वीकार करता है।
CRR (Cash Reserve Ratio) बैंकों को अपनी कुल जमा (NDTL) का एक निश्चित % RBI के पास नकद रूप में रखना अनिवार्य होता है।
SLR (Statutory Liquidity Ratio) बैंकों को अपनी जमा का निश्चित % स्वयं के पास तरल परिसंपत्तियों (सोना, सरकारी प्रतिभूतियों) में रखना होता है।
OMO (Open Market Operations) खुले बाजार में RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) का क्रय-विक्रय। (प्रतिभूतियाँ बेचने से बाजार से नकदी सोख ली जाती है)।
Unit III

Money Supply and Financial Markets

3.1 RBI Measures of Money Supply: M1, M2, M3, M4 (मुद्रा आपूर्ति के माप)
RBI Money Supply Framework (1977 Standards):

M1 (Narrow Money - संकीर्ण मुद्रा): \[ M1 = C + DD + OD \] (जनता के पास मुद्रा $C$ + बैंकों में माँग जमा $DD$ + RBI के पास अन्य जमा $OD$)

M2: \[ M2 = M1 + \text{डाकघर बचत बैंकों में बचत जमा} \]

M3 (Broad Money - व्यापक मुद्रा): \[ M3 = M1 + \text{बैंकों के पास आवधिक/सावधि जमा (Time Deposits)} \]

M4: \[ M4 = M3 + \text{डाकघर की कुल जमा (NSC छोड़कर)} \]

Order of Liquidity (तरलता का क्रम):

$M_1 > M_2 > M_3 > M_4$ (M1 सर्वाधिक तरल है, जबकि M4 सबसे कम तरल है)।

3.2 Money Market vs Capital Market (मुद्रा बाजार बनाम पूँजी बाजार)
तुलना आधार मुद्रा बाजार (Money Market) पूँजी बाजार (Capital Market)
ऋण की समयावधि अल्पकालिक ऋण (1 वर्ष से कम अवधि हेतु)। मध्यम एवं दीर्घकालिक ऋण (1 वर्ष से अधिक)।
प्रमुख साधन (Instruments) Call Money, Treasury Bills (T-Bills), Commercial Paper, CD. इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड।
नियामक (Regulator) भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI)।
Unit IV

Banking Sector Reforms, NPAs and FinTech

4.1 Narasimham Committee Reforms & Basel Norms (बैंकिंग सुधार)

एम. नरसिम्हम समिति I (1991) तथा II (1998) की सिफारिशों पर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार किए गए: CRR/SLR में कमी, ब्याज दरों का विनियमन, और बासेल मानकों का अंगीकरण।

Capital Adequacy Ratio - CAR / CRAR

\[ \text{CAR} = \frac{\text{Tier 1 Capital} + \text{Tier 2 Capital}}{\text{Risk-Weighted Assets (RWA)}} \times 100 \]

बासेल III मानकों के अनुसार बैंकों को कम से कम 9% CAR बनाए रखना अनिवार्य है।

4.2 Non-Performing Assets (NPA) & Insolvency Code - IBC 2016

यदि किसी ऋण पर मूलधन या ब्याज का भुगतान 90 दिनों तक न मिले, तो उसे गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) घोषित कर दिया जाता है।

IBC 2016 (दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता):

2016 में लागू IBC ने कॉर्पोरेट दिवालियापन प्रक्रिया के समाधान की समयावधि (180+90 दिन) निर्धारित की तथा NCLT (National Company Law Tribunal) को निर्णायक प्राधिकरण बनाया।

4.3 Digital Banking: UPI, Payments Banks & CBDC (डिजिटल बैंकिंग)

NPCI द्वारा विकसित UPI (Unified Payments Interface) ने भारत में डिजिटल लेनदेन में क्रांति ला दी है। इसके अतिरिक्त RBI ने CBDC (Central Bank Digital Currency / e-Rupee) का पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया है।

Exam Special

Examination Question Bank & Revision Tools

Long Answer Questions (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)
Q1 (15 Marks) इरविंग फिशर के मुद्रा परिमाण सिद्धांत का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। यह कैम्ब्रिज दृष्टिकोण से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर रूपरेखा: 1. फिशर का समीकरण $MV=PT$, 2. मान्यताएँ ($V, T$ स्थिर), 3. सिद्धांत का निष्कर्ष ($M \uparrow \implies P \uparrow$), 4. आलोचनाएँ (कीन्स द्वारा), 5. कैम्ब्रिज समीकरण $M=kPY$ से तुलना।

Quick Revision Flashcards
फिशर का मुख्य समीकरण क्या है?
MV = PT (या P = MV / T)
साख गुणक (Credit Multiplier) का सूत्र?
K = 1 / CRR
Narrow Money (M1) की परिभाषा?
M1 = C + DD + OD
RBI का राष्ट्रीयकरण कब हुआ?
1 जनवरी 1949 को।
Practice MCQs
Q1. यदि CRR = 20% है, तो प्रारंभिक जमा ₹5,000 से कुल कितना साख सृजन होगा?
A) ₹10,000
B) ₹25,000
C) ₹50,000
D) ₹1,00,000
व्याख्या: $K = 1 / 0.20 = 5$। अतः कुल साख = $5,000 \times 5 = ₹25,000$।
Key Terms Glossary
Repo Rate
जिस दर पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है।
NPA
Non-Performing Asset — 90 दिनों तक भुगतान न मिलने वाला असूलनीय ऋण।
Official Syllabus