अर्थशास्त्र ऐच्छिक प्रश्नपत्र II

मुद्रा, बैंकिंग एवं मौद्रिक नीति

यह संपूर्ण पाठ्यपुस्तक मुद्रा के सिद्धांतों, वाणिज्यिक बैंकों द्वारा साख सृजन, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के उपकरणों (रेपो दर, CRR, SLR), मुद्रा की पूर्ति के मापों (M1-M4), तथा बैंकिंग सुधारों और NPA संकट का विस्तृत विश्लेषण प्रदान करती है।

फिशर का समीकरण MV = PT परिमाण सिद्धांत
साख गुणक 1 / LRR साख सृजन सूत्र
RBI मौद्रिक नीति रेपो, रिवर्स रेपो, CRR, SLR
इकाई 1

मुद्रा के कार्य एवं परिमाण सिद्धांत

1.1 मुद्रा के प्राथमिक एवं द्वितीयक कार्य

मुद्रा एक ऐसी वस्तु है जो सामान्य स्वीकृति प्राप्त करती है। किनले (Kinley) के अनुसार मुद्रा के कार्यों को 3 श्रेणियों में बांटा गया है:

मुद्रा के मुख्य कार्य:

  • प्राथमिक कार्य: 1. विनिमय का माध्यम (Medium of Exchange), 2. मूल्य का मापक (Measure of Value)।
  • द्वितीयक कार्य: 3. स्थगित भुगतानों का मान (Standard of Deferred Payments), 4. मूल्य का संचय (Store of Value)।
  • आकस्मिक कार्य: राष्ट्रीय आय के वितरण और साख के आधार के रूप में।
1.2 इरविंग फिशर का मुद्रा परिमाण सिद्धांत (1911)
फिशर का विनिमय समीकरण (Equation of Exchange):
$$MV = PT \quad \implies \quad P = \frac{MV}{T}$$

जहाँ $M$ = मुद्रा की मात्रा, $V$ = मुद्रा का चलन वेग, $P$ = सामान्य मूल्य स्तर, $T$ = सौदों की कुल मात्रा।

फिशर के अनुसार यदि $V$ तथा $T$ स्थिर रहें, तो मुद्रा की मात्रा ($M$) में परिवर्तन के सीधे अनुपात में सामान्य मूल्य स्तर ($P$) बदलता है।

1.3 कैम्ब्रिज नकद शेष दृष्टिकोण (Marshall, Pigou, Robertson)
कैम्ब्रिज समीकरण:
$$M = k \cdot P \cdot Y$$

जहाँ $k$ = वास्तविक आय का वह भाग जिसे लोग नकद रूप में रखना चाहते हैं, $Y$ = वास्तविक राष्ट्रीय आय, $P$ = मूल्य स्तर।

इकाई 2

वाणिज्यिक बैंकिंग, साख सृजन एवं RBI मौद्रिक नीति

2.1 वाणिज्यिक बैंकों द्वारा साख सृजन (Credit Creation Formula)
कुल साख सृजन सूत्र:
$$\text{कुल साख} = \text{प्राथमिक जमा} \times \frac{1}{\text{LRR}}$$

यदि प्राथमिक जमा ₹1,000 है और विधिक आरक्षित अनुपात (LRR) 20% है, तो कुल साख = ₹1,000 × (1 / 0.20) = ₹5,000 होगी।

2.2 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के उपकरण
उपकरण का नाम प्रकार कार्यप्रणाली एवं प्रभाव
रेपो दर (Repo Rate) मात्रात्मक RBI द्वारा वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण देने की दर। रेपो दर बढ़ाने से लोन महंगे होते हैं और मुद्रास्फीति कम होती है।
CRR (नकद आरक्षित अनुपात) मात्रात्मक बैंकों की कुल जमा का वह प्रतिशत जो RBI के पास नकद रखना अनिवार्य है।
SLR (वैधानिक तरलता अनुपात) मात्रात्मक बैंकों को अपनी जमा का निश्चित भाग अपने पास सरकारी प्रतिभूतियों या स्वर्ण रूप में रखना होता है।
इकाई 3

मुद्रा की पूर्ति के माप (M1, M2, M3, M4)

3.1 RBI द्वारा मुद्रा पूर्ति के 4 मापदंड
  • M1 (संकीर्ण मुद्रा - Narrow Money): जनता के पास करेंसी + बैंकों में मांग जमा (Demand Deposits) + RBI के पास अन्य जमा।
  • M2: M1 + डाकघर बचत बैंकों में बचत जमा।
  • M3 (व्यापक मुद्रा - Broad Money): M1 + बैंकों के पास समय जमा (Term Deposits)।
  • M4: M3 + डाकघर की कुल जमा (NSC को छोड़कर)।
इकाई 4

बैंकिंग सुधार, NPAs एवं दिवाला कोड (IBC 2016)

4.1 गैर-निष्पादित परिसंपत्तियाँ (NPAs) एवं नृसिंहम समिति सुधार

जब किसी ऋण का मूलधन या ब्याज 90 दिनों तक चुकता नहीं किया जाता है, तो उसे NPA (Non-Performing Asset) घोषित किया जाता है। इसके समाधान के लिए IBC Code 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code) और UPI डिजिटल बैंकिंग सुधार लागू किए गए।

परीक्षा विशेष

परीक्षा प्रश्न बैंक एवं पुनरीक्षण उपकरण

त्वरित पुनरीक्षण फ्लैशकार्ड
फिशर के समीकरण MV = PT में P किसे दर्शाता है?
सामान्य मूल्य स्तर (General Price Level)।
RBI द्वारा किस दर पर वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण दिया जाता है?
रेपो दर (Repo Rate)।
मुद्रा की पूर्ति के किस माप को 'संकीर्ण मुद्रा' (Narrow Money) कहा जाता है?
M1 (चलन में मुद्रा + बैंकों में मांग जमा)।
अभ्यास प्रश्न (MCQs)
प्र1. यदि विधिक आरक्षित अनुपात (LRR) 20% है, तो साख गुणक का मान कितना होगा?
क) 2
ख) 5
ग) 10
घ) 20
स्पष्टीकरण: साख गुणक = 1 / LRR = 1 / 0.20 = 5।
आधिकारिक सिलेबस