भू-आकृति विज्ञान एवं आर्थिक भूगोल
यह संपूर्ण पाठ्यपुस्तक भौतिक भू-आकृति विज्ञान, पृथ्वी की आंतरिक संरचना (सियाल, सीमा, निफे), प्लेट विवर्तनिकी, डेविस का अपरदन चक्र, वायुमंडल की परतें, अल्फ्रेड वेबर का औद्योगिक अवस्थिति मॉडल तथा भारतीय मानसून की प्रक्रिया का विस्तृत अध्ययन प्रदान करती है।
भू-आकृति विज्ञान एवं आंतरिक संरचना
भूकंपीय तरंगों की गति में परिवर्तन ($P$ एवं $S$ तरंगें) पृथ्वी की संकेंद्री परतदार संरचना का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करते हैं:
| परत / असंततता रेखा | रासायनिक संगठन / घनत्व | मुख्य भौतिक विशेषताएँ |
|---|---|---|
| भूपर्पटी (सियाल - SIAL) | सिलिका + एल्युमीनियम ($2.7 \, \text{g/cm}^3$) | ग्रेनाइट युक्त महाद्वीपीय भूपर्पटी तथा बेसाल्ट युक्त महासागरीय भूपर्पटी। |
| मोहो असंततता (Moho) | भूपर्पटी और मेंटल की सीमा। | P-तरंगों की गति 6.9 से बढ़कर 8.1 किमी/सेकंड हो जाती है। |
| मेंटल (सीमा - SIMA) | सिलिका + मैग्नीशियम ($3.3 - 5.7 \, \text{g/cm}^3$) | एस्थेनोस्फीयर (100-200 किमी) मैग्मा का मुख्य स्रोत है जहाँ प्लेट गति होती है। |
| गुटेनबर्ग असंततता | मेंटल और क्रोड की सीमा (2,900 किमी)। | S-तरंगें पूरी तरह समाप्त हो जाती हैं (यह सिद्ध करता है कि बाह्य क्रोड द्रव है)। |
| क्रोड (निफे - NIFE) | निकेल + लोहा ($11 - 13 \, \text{g/cm}^3$) | द्रव बाह्य क्रोड तथा ठोस आंतरिक क्रोड (लेहमैन असंततता)। |
अल्फ्रैड वेगनर के महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत (1912) के बाद हैरी हैस और मॉर्गन ने प्लेट विवर्तनिकी सिद्धांत प्रतिपादित किया। स्थलखंड 7 मुख्य तथा कई छोटी विवर्तनिक प्लेटों में विभाजित है।
प्लेट सीमाओं के प्रकार:
- 1. अभिसारी सीमा (Convergent Boundary): दो प्लेटें एक-दूसरे की ओर आती हैं; एक प्लेट नीचे धंसती है (जैसे हिमालय का निर्माण)।
- 2. अपसारी सीमा (Divergent Boundary): दो प्लेटें विपरीत दिशा में दूर जाती हैं; नए क्रस्ट का निर्माण होता है (जैसे मध्य-अटलांटिक कटक)।
- 3. रूपांतरण सीमा (Transform Boundary): प्लेटें एक-दूसरे के समानांतर फिसलती हैं (जैसे सैन एंड्रियास भ्रंश)।
विलियम मॉरिस डेविस के अनुसार स्थलरूप का विकास संरचना (Structure), प्रक्रम (Process) और अवस्था (Stage) का प्रतिफल है ("डेविस का त्रिक"):
स्थलरूप विकास की तीन अवस्थाएँ:
- युवावस्था (Youth Stage): तीव्र लंबवत कटाव, V-आकार की घाटियाँ, गॉर्ज, जलप्रपात एवं उच्च उच्चावच।
- प्रौढ़ावस्था (Mature Stage): क्षैतिज अपरदन की प्रधानता; घाटी का चौड़ा होना, नदी विसर्प (Meanders)।
- वृद्धावस्था (Old Age Stage): समप्राय मैदान (Peneplain) का निर्माण; यत्र-तत्र अवशिष्ट पहाड़ियाँ (Monadnocks)।
वायुमंडल की संरचना एवं समुद्र विज्ञान
वायुमंडल को तापीय विशेषताओं के आधार पर 5 प्रमुख परतों में विभाजित किया गया है: क्षोभमंडल (Troposphere - सभी मौसम घटनाएँ), समतापमंडल (Stratosphere - ओजोन परत), मध्यमंडल (Mesosphere - न्यूनतम तापमान), आयनमंडल (Ionosphere - रेडियो संचार) तथा बाह्यमंडल (Exosphere)।
महासागरीय नितल को 4 मुख्य भागों में बांटा गया है: 1. महाद्वीपीय मग्नतट (Continental Shelf), 2. महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope), 3. गहरे महासागरीय मैदान (Abyssal Plain), 4. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches - जैसे मरियाना गर्त)।
आर्थिक भूगोल एवं अवस्थिति सिद्धांत
औद्योगिक अवस्थिति के नियम:
- यदि $\text{MI} > 1$ (भार-ह्रासी कच्चा माल): उद्योग कच्चे माल के स्रोत के पास स्थापित होगा (जैसे चीनी मिलें, लोहा-इस्पात उद्योग)।
- यदि $\text{MI} = 1$ (शुद्ध कच्चा माल): उद्योग स्रोत या बाजार में कहीं भी स्थापित हो सकता है (जैसे सूती वस्त्र उद्योग)।
- यदि $\text{MI} < 1$ (भार-वर्द्धक कच्चा माल): उद्योग उपभोग बाजार के निकट स्थापित होगा (जैसे शीतल पेय बॉटलिंग)।
भारत का भू-आकृतिक स्वरूप एवं मानसून तंत्र
भारतीय मानसून ग्रीष्मकाल में उत्तर-भारत के मैदानों पर निर्मित तापीय निम्न वायुदाब तथा दक्षिण-हिंद महासागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं (South-West Monsoon) पर निर्भर करता है। अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का उत्तर की ओर खिसकना तथा जेट स्ट्रीम मानसून आगमन को नियंत्रित करते हैं।
परीक्षा प्रश्न बैंक एवं पुनरीक्षण उपकरण
उत्तर ढांचा: क्रस्ट (सियाल), मेंटल (सीमा), क्रोड (निफे) का विवरण दें। मोहो, गुटेनबर्ग एवं लेहमैन असंततता रेखाओं का भूकंपीय तरंगों (P एवं S तरंगों) के आधार पर सचित्र वर्णन करें।
उत्तर ढांचा: न्यूनतम परिवहन लागत मान्यता, पदार्थ सूचकांक (MI > 1, MI = 1, MI < 1), श्रम लागत विचलन तथा अग्लोमिरेशन (Agglomeration) प्रभाव का विवरण दें।
- 1. डेविस के 'समप्राय मैदान' (Peneplain) एवं मोनाडनॉक से आप क्या समझते हैं?
- 2. अभिसारी एवं अपसारी प्लेट सीमाओं में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
- 3. ITCZ (अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र) मानसून को कैसे प्रभावित करता है?