संस्कृति, परंपराएं एवं नैतिक मूल्य (CTMV)
यह पाठ्यपुस्तक भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के अंतर, सर्वभौमिक नैतिक मूल्यों (सत्य, अहिंसा, करुणा), 'वसुधैव कुटुंबकम', श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म सिद्धांत, भारतीय संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल्यों (अनुच्छेद 51A मौलिक कर्तव्य) तथा आधुनिक युग में डिजिटल नैतिकता (Cyber Ethics) का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है।
भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता
मैकाइवर एवं पेज के अनुसार, "संस्कृति वह है जो हम हैं, जबकि सभ्यता वह है जिसका हम उपयोग करते हैं।"
| मापदंड | संस्कृति (Culture) | सभ्यता (Civilization) |
|---|---|---|
| प्रकृति | आंतरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक मूल्य। | बाह्य, भौतिक एवं तकनीकी साधन। |
| प्रगति | संस्कृति का हस्तांतरण प्रयास साध्य है। | सभ्यता की तकनीकें तेजी से प्रसारित होती हैं। |
भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषताएं हैं: प्राचीनता एवं निरंतरता, विविधता में एकता, सहिष्णुता, सर्वांगीणता, तथा आध्यात्मिक एवं भौतिक जीवन का संतुलन।
नैतिक मूल्य एवं दर्शन
महात्मा गांधी के अनुसार सत्य ही ईश्वर है। अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा न करना नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न पहुँचाना है।
महाउपनिषद से मूल श्लोक:
"अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥"
अर्थात्: 'यह मेरा है और वह पराया है'— ऐसी सोच संकीर्ण मन वालों की होती है। उदार हृदय वाले व्यक्तियों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।
संवैधानिक मूल्य एवं मौलिक कर्तव्य
भारतीय संविधान की प्रस्तावना न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के आदर्शों को स्थापित करती है। अनुच्छेद 51A के तहत नागरिकों के लिए 11 मौलिक कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं जिनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना एवं पर्यावरण की रक्षा करना प्रमुख हैं।
डिजिटल नैतिकता (Digital Ethics) एवं साइबर व्यवहार
डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार, दूसरों की निजता (Privacy) का सम्मान करना, कॉपीराइट का पालन करना तथा फेक न्यूज को फैलने से रोकना प्रत्येक नागरिक का डिजिटल कर्तव्य है।